Yahoo! 360° News | Beta Feedback
Start your own Yahoo! 360° page

धूप- बारिश

Top Page  |  Blog  |  Feeds  |  Friends  |  Lists  |  Groups

Add

धूप- बारिश is not connected to you in Yahoo! 360°.

Last updated Fri Nov 02, 2007 Member since April 2005

This blog is written in Hindi. For correct display of characters click view> encoding> Unicode (UTF-8) आज सुबह सैर के बाद...--> Click here

1 - 5 of 12 First | < Prev | Next > | Last

अभिव्यक्ति की दुनिया Full Post View | List View

कुछ पल धरती धूप और आकाश के नाम

खत्म होता नहीं इंतज़ार
खत्म होता नहीं इंतज़ार magnify

अब भी भर आती आँखें
यदा कदा
प्रेरणा के पंख
बन जाते सहारा
अब भी यादों की बाहें
सँभाल लेती लड़खड़ाते ही
बात होती नहीं
लेकिन
कोरे कागज़ पर उभर आते
हीरक शब्द
अब भी सन्नाटे में गूँजते साम
दिखा देता दिशा
विश्वास का ध्रुवतारा
अँधेरा अब भी बदलता सुबह में
समय बीतता है
पर
खत्म होता नहीं इंतज़ार
अब भी बाकी है दोस्ती पर भरोसा

Tags: कविता
Tuesday November 25, 2008 - 04:37pm (GST) Permanent Link | 0 Comments
शहर में बरसात
शहर में बरसात magnify

नगरनामा के अंतर्गत शहरों पर लिखी गई कविताओं में से तीसरी कविता आज पोस्ट कर रही हूँ। साल 2002 , कार के भीतर से दुबई में जहाँ बरसात कभी-कदा ही होती है।

शहर में बरसात हुई
भीगी-सी ठंडी-सी रात हुई

भली लगीं खिड़की पर
शीशे से टकरातीं
कोमल बौछारें
सड़कों पर मंद हुई
तेज़ तेज़ दौड़ रही
कार की कतारें

प्रतिबिम्बित होती हैं बहुरंगी बत्तियां
सजधज बाज़ारों की
बड़े-बड़े ग्लो साइन
बारिश की धारों में अजब समा देते हैं
धुंधलाता है सामने का कांच
कठिन श्रम करते हैं वाइपर
परे सिमटती है
कोलाहल भरी भीड़

छोटे से कैफे में
शीशे गिराता है लड़का
सिमटा मुस्काता सा
कड़ाहे में पलटता है बार-बार
फिलाफल के पकौड़ों को
दौड़-दौड़ कर परोसता है कावा के गर्म प्याले

गहराई सड़कों पर
टिप टिप कर बहुत तेज़
होता है टंकित
नया गीत वर्षा का
कौन है लिपिक?

Tags: नगरनामा
Wednesday September 19, 2007 - 03:52am (GST) Permanent Link | 4 Comments
कितना अच्छा लगता है
कितना अच्छा लगता है magnify
शहरों पर लिखी गई कविताओं में से एक और कविता- रचना का समय है अप्रैल 1990 और रचना है- ' कितना अच्छा लगता है'। चित्र है 'एक सुबह जयपुर में' और चित्र गरमियों का नहीं, किसी गुलाबी सर्दी का है जब जैकेट की ज़रूरत रही होगी पर पहनी नहीं गई होगी और गुलमोहर भी खिले नहीं होंगे।

कितना अच्छा लगता है
जयपुर की सड़कों पर
जाना
रोज़ टहलने
गर्मी के मौसम में तड़के

थोड़े से अंधियारे में
सड़क किनारे
बिछी खाट पर

सोते हैं जन
रंग बिरंगी कथरी ओढ़े
टुकड़ों-टुकड़ों गुथी कला के
सहज फलक से

धीमे-धीमे बहती है पुरवा
अमलतास के
स्वर्ण घुँघरुओं को झनकाती

खिले हुए
गुलमोहरों से ढकी
हलचल रहित स्तब्ध वधूटी जैसी
निर्मल सड़कें
शांत!!

घने यातायातों से दूर
ऊँट गाड़ी का सहज गुज़रना
धीरे-धीरे
झरती हुई नीम के नीचे
कितना अच्छा लगता है
सूरज के आने से पहले
घने शहर में
कोलाहल भर जाने से पहले।

Tags: नगरनामा
Monday June 18, 2007 - 12:14am (GST) Permanent Link | 3 Comments
रंग
रंग magnify

होली के अवसर पर उनके लिए जिन्हें कविताओं की याद आती है इन्सानों की तरह -

जो फागुन में बिखरता है
जो मौसम में निखरता है
वही है रंग

जो होली में फुहारों पर
औ' दीवाली दिवारों पर
वही है रंग

जो दुनिया को लुभाता है
जो महफिल को जमाता है
वही है रंग

हिना में जो बसा करता
जो होंठों पर रचा करता
वही है रंग

ढंग में जो मिला रहता
मंच में भी सिला रहता
वही है रंग

ये दुनिया जिसपे मरती है
औ' जिसमें भंग पड़ती है
वही है रंग

ज़माना जिसमें ढलता है
औ' गिरगिट जो बदलता है
वही है रंग

जो खुशहाली में छाता है
जो गम़ में याद आता है
वही है रंग

जो नर के माथ चढ़ता है
पांव नारी के पड़ता है
वही है रंग

जो उड़ता है उतरता है
बरसता और बिगड़ता है
वही है रंग

Tags: कविता
Sunday March 4, 2007 - 12:21am (GST) Permanent Link | 3 Comments
गुलमोहर दोहे
गुलमोहर दोहे magnify

गुलदस्ते में फूल हैं जंगल में हैं आग
सडकों पर सौंदर्य हैं छाया में अनुराग

फूलों की बारात है गुलमोहर के संग
कलियों वाली डाल पर किसने फेंका रंग

गुलमोहर की छांह का सूरज से संवाद
इस मौसम की साल भर क्यों आती है याद

सडकें जितनी जल रहीं नभ जितना बेचैन
गुलमोहर की छांह में मन को उतना चैन

धीरे धीरे कर रहीं फलियां मीठी बात
गुलमोहर के गात पर पुलकित है वातास

गुलमोहर की छांह में गरमी की चौपाल
फूलों वाले दीप हैं माटी वाला थाल

चंवर डुलाती हिल रही गुलमोहर की बांह
अपना समझे जो हमें आए हमारी छांह

Tags: दोहे
Friday June 16, 2006 - 03:00pm (GST) Permanent Link | 9 Comments

Add अभिव्यक्ति की दुनिया to your personalized My Yahoo! page:

Add to My Yahoo!RSS About My Yahoo! & RSS
1 - 5 of 12 First | < Prev | Next > | Last